‘लड़की हूँ फंसा दूँगी’ की धमकी देने वाली महिला पोस्टमैन पर सख्त कार्रवाई: पिथौरागढ़ में दो महीने से दबा रखी थी डाक, वायरल वीडियो के बाद निलंबन

Aadesh Live Admin
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आरोपी महिला पोस्टमैन

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र से सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और पद के दुरुपयोग का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने डाक विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धारचूला तहसील के सुदूरवर्ती जाराजिबली पोस्ट ऑफिस में तैनात एक महिला ग्रामीण डाक सेवक (GDS) को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने, ग्रामीणों से अभद्रता करने और उन्हें कानून का डर दिखाकर डराने-धमकाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह प्रशासनिक कदम तब उठाया गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें उक्त महिला पोस्टमैन ग्रामीणों से तीखी नोकझोंक के दौरान बेहद आक्रामक लहजे में यह कहती हुई दिखाई दे रही थी कि “लड़की हूँ, फंसा दूँगी।” इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए डाक विभाग तुरंत एक्शन मोड में आया और प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद महिला पोस्टमैन पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई है।

दो महीने से डंप पड़े थे पहचान पत्र, ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा

जमीनी हकीकत और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जाराजिबली क्षेत्र के ग्रामीण पिछले लंबे समय से अपने जरूरी सरकारी दस्तावेजों, पत्रों और आवश्यक सूचनाओं का इंतजार कर रहे थे। हरियाणा की मूल निवासी पारुल यहाँ ग्रामीण डाक सेवक के पद पर कार्यरत थीं। स्थानीय निवासियों का आरोप था कि महिला डाककर्मी हफ्तों और महीनों तक डाक का वितरण नहीं करती थीं।

जब सीमांत क्षेत्र के परेशान ग्रामीणों ने डाकघर पहुंचकर इस देरी का कारण पूछा और अपनी शिकायत दर्ज करानी चाही, तो महिला कर्मचारी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय ग्रामीणों के साथ बेहद अमर्यादित और उग्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। इसी तीखी बहस के दौरान जब एक ग्रामीण ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, तो महिला पोस्टमैन ने देश के संवेदनशील कानूनों का गलत सहारा लेने की नीयत से कैमरे के सामने ही धमकी दे डाली कि वह महिला होने का फायदा उठाकर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसा देगी। वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही पूरे क्षेत्र में जनआक्रोश भड़क गया।

डाक निरीक्षक की छापेमारी में खुली पोल: अलमारियों से निकले ‘दबे हुए अरमान’

जनता के बढ़ते दबाव और वायरल वीडियो की गंभीरता को देखते हुए धारचूला के डाक निरीक्षक आशीष राणा स्वयं जांच के लिए सुदूरवर्ती जाराजिबली पोस्ट ऑफिस पहुंचे। जांच अधिकारी की मौजूदगी में जब डाकघर के रिकॉर्ड और अलमारियों को खंगाला गया, तो वहां का नजारा देखकर खुद विभागीय अधिकारी भी दंग रह गए।

डाक निरीक्षक आशीष राणा ने मीडिया को बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ है कि महिला कर्मचारी द्वारा जानबूझकर और लापरवाही से जनता के अति-महत्वपूर्ण पहचान पत्रों को रोककर रखा गया था। पहाड़ों में वैसे ही संचार और परिवहन के साधन सीमित होते हैं, ऐसे में दूरदराज के गांवों में रहने वाले बुजुर्गों, युवाओं और पेंशनभोगियों के लिए ये पहचान पत्र कितने जरूरी होते हैं, इसकी संवेदनशीलता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

सुरक्षा और प्रशासनिक कदम: आरोपी कर्मी को हटाया, नई तैनाती लागू

विभागीय जांच में लापरवाही, अभद्रता और धमकी देने के संगीन आरोपों की पुष्टि होने के तुरंत बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर महिला पोस्टमैन पर सख्त कार्रवाई की गई। डाक अधीक्षक को ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी महिला कर्मी पारुल को जाराजिबली डाकघर के पद से हटा दिया गया है और उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित (शिफ्ट) कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों को होने वाली असुविधा को तत्काल दूर करने के लिए विभाग ने जाराजिबली डाकघर में एक अन्य वैकल्पिक कर्मचारी की स्थाई तैनाती कर दी है, जिसने कार्यभार संभालते ही डंप पड़ी डाक और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीणों के घर-घर तक पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।

पहाड़ों में ‘सिस्टम’ की मनमानी और स्थानीय लोगों का दर्द

यह घटना केवल एक डाकघर की लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में तैनात बाहरी कर्मचारियों की उदासीन कार्यशैली और स्थानीय जनता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। धारचूला जैसे दुर्गम क्षेत्रों में, जहां लोगों को एक अदद सरकारी कागजात या पहचान पत्र बनवाने के लिए मीलों दूर जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहां सरकारी तंत्र के ऐसे कारनामे जनमानस को हताश करते हैं।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब कोई कर्मचारी यह सोच लेता है कि पहाड़ों के सीधे-साधे और भोले-भाले ग्रामीण उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, और वह अपने लिंग या पद का दुरुपयोग कर “लड़की हूँ फंसा दूँगी” जैसी धमकियां खुलेआम देने लगता है, तो कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता दोनों ही खतरे में पड़ जाती हैं। इस मामले में डाक विभाग द्वारा त्वरित गति से की गई महिला पोस्टमैन पर सख्त कार्रवाई ने निश्चित रूप से एक नजीर पेश की है कि जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ और अनुचित धमकियां किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

विभाग के इस कड़े रुख से सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के डाकघरों और अन्य सरकारी दफ्तरों में इस प्रकार की मनमानी पर पूरी तरह से अंकुश लगेगा।

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