अयोध्या में स्थित भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा घोटाले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की है। जांच एजेंसियां लगातार संदिग्ध कर्मचारियों और मंदिर से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही हैं। आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की रकम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
बताया जा रहा है कि इस मामले में अब तक छह ऐसे प्रमुख नाम सामने आए हैं जिन पर दान की राशि में हेराफेरी करने और कम समय में भारी संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। हालांकि सभी आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसआईटी फिलहाल सभी तथ्यों और साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।
7 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की जांच
राम मंदिर के दान पात्रों में आने वाले चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि लगभग 7 करोड़ रुपये की राशि में गड़बड़ी हुई है। इस संबंध में अयोध्या के विभिन्न थानों में तीन शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। जिला प्रशासन, पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर सबसे ज्यादा निगाहें
इस मामले में सबसे चर्चित नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का है। बताया जाता है कि वह पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रहे और बाद में उनके सहयोगी के रूप में कार्य करने लगे। जांच के दौरान उनके नाम अयोध्या और लखनऊ में बड़ी संपत्ति होने के दावे सामने आए हैं।
आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में टिन्नू ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की, जिसमें कई प्लॉट, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी और एक गेस्ट हाउस शामिल है। कुछ रिपोर्टों में उनके पास करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों द्वारा उनके आवास से सोना बरामद किए जाने की भी चर्चा है।
हालांकि टिन्नू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका मंदिर के चढ़ावे से कोई संबंध नहीं है और वे वर्षों से विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा पूरी तरह गलत है और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
मनीष यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में
टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव का नाम भी इस मामले में सामने आया है। मनीष मंदिर में दान की राशि गिनने वाली टीम का हिस्सा बताए जाते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी करने में सहयोग किया।
सूत्रों के अनुसार उनकी निशानदेही पर लगभग 36 लाख रुपये की बरामदगी हुई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। एसआईटी मनीष यादव से लगातार पूछताछ कर रही है और उनके वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
व्यवस्थापक गोपाल राव पर भी उठे सवाल
राम मंदिर के व्यवस्थापक और ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव भी जांच के केंद्र में हैं। मंदिर की साफ-सफाई, रखरखाव और दान पेटियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी लंबे समय से उनके पास रही है।
उन पर आरोप लगाया गया है कि चढ़ावे की रकम के प्रबंधन में अनियमितताएं हुईं। हालांकि गोपाल राव ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन्होंने खुद इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा पर संपत्ति बढ़ने के आरोप
चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में शामिल लवकुश मिश्रा और उनके जीजा-साले संबंधी अनुकल्प मिश्रा भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि दोनों की आर्थिक स्थिति कुछ वर्षों में अचानक काफी मजबूत हो गई।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार अनुकल्प मिश्रा ने अपने गांव में एक बड़ा फॉर्महाउस तैयार कराया है और अयोध्या में करीब 65 लाख रुपये का मकान खरीदा है। वहीं लवकुश मिश्रा फैजाबाद क्षेत्र में नया मकान बनवा रहे थे। उनके पास से लगभग 10 लाख रुपये बरामद होने की भी चर्चा है।
आरोप है कि दोनों ने दान पात्रों से प्राप्त राशि की गिनती और प्रबंधन के दौरान हेराफेरी की। हालांकि उनके परिवार के लोगों ने इन आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि दोनों को साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है। एसआईटी इन दोनों से भी लगातार पूछताछ कर रही है।
केडी तिवारी पर जेवरों के प्रबंधन को लेकर सवाल
राम मंदिर में दान स्वरूप आने वाले सोने-चांदी के जेवरों की देखरेख की जिम्मेदारी केडी तिवारी के पास बताई जाती है। जांच में उनके नाम भी कई सवाल उठे हैं।
आरोप है कि उन्होंने हाल ही में लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन खरीदी और कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। कुछ दावों में उनके पास करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की बात कही गई है।
केडी तिवारी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उनकी संपत्ति पूरी तरह वैध है। उन्होंने बताया कि वे कई वर्षों तक शिक्षक रहे हैं। उनके परिवार के सदस्य भी विभिन्न सरकारी सेवाओं में रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसियां चाहें तो उनकी पूरी संपत्ति की जांच कर सकती हैं।
डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी चर्चा में
राम मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी इस मामले में चर्चा का विषय बना हुआ है। मंदिर निर्माण और दान से जुड़े विभिन्न कार्यों की निगरानी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
अयोध्या में उनका एक आवास पहले से मौजूद है, जबकि अवधपुरी क्षेत्र में नया मकान निर्माणाधीन बताया जा रहा है। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े होने के कारण उनके कार्यों की भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि अभी तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की प्रत्यक्ष वित्तीय अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं।
जांच पूरी होने तक आरोप साबित नहीं
राम मंदिर चढ़ावा मामले में सामने आए सभी नाम फिलहाल जांच के दायरे में हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी तक किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। एसआईटी साक्ष्यों, बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी कथित घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच न केवल कानून व्यवस्था बल्कि जनता के विश्वास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।