नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल टेलीग्राम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला भारत में होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के री-एग्जाम से जुड़ा है। सरकार ने परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए 22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। साथ ही 30 जून तक पुराने संदेशों को एडिट करने वाले फीचर को भी बंद रखने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम किसी नए पेपर लीक की घटना के कारण नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़े फर्जी संदेशों, अफवाहों और भ्रामक दावों को रोकने के लिए उठाया गया है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने भी इस फैसले का समर्थन किया है और इसे छात्रों के हित में बताया है। हालांकि टेलीग्राम प्रबंधन और इसके सीईओ इस निर्णय से सहमत नहीं दिख रहे हैं। भारत में उठाए गए इस कदम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आखिर टेलीग्राम बार-बार विवादों में क्यों आता है और कई देशों ने इस पर प्रतिबंध या कड़े नियम क्यों लगाए हैं।
क्यों बढ़ रही हैं टेलीग्राम को लेकर चिंताएं?
पिछले कुछ वर्षों में टेलीग्राम का नाम साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा लीक, पेपर लीक और फर्जी सूचनाओं के प्रसार जैसे मामलों में कई बार सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटफॉर्म की कुछ विशेषताएं इसे अपराधियों और ठगों के लिए आकर्षक बनाती हैं।
टेलीग्राम पर अकाउंट बनाना अपेक्षाकृत आसान है और यहां हजारों या लाखों सदस्यों वाले बड़े चैनल और समूह बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा बॉट्स और ऑटोमेशन की सुविधा के कारण कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना संभव हो जाता है। यही वजह है कि कई बार फर्जी निवेश योजनाओं, साइबर ठगी और परीक्षा से जुड़े फर्जी दावों को फैलाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।
सबसे ज्यादा चर्चा इसके संदेश संपादन (Edit Message) फीचर को लेकर होती रही है। इस फीचर की मदद से पहले से भेजे गए संदेशों में बदलाव किया जा सकता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ मामलों में इसका गलत इस्तेमाल कर पुराने संदेशों को बदलकर भ्रम पैदा किया गया या फर्जी दावे साबित करने की कोशिश की गई।
विवादों की मुख्य वजहें क्या हैं?
टेलीग्राम को लेकर सरकारों और नियामक संस्थाओं की कई चिंताएं रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्न बिंदु शामिल हैं—
- टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को प्राथमिकता देता है और कई मामलों में सरकारों के साथ डेटा साझा करने से बचता है।
- सार्वजनिक चैनलों और समूहों पर निगरानी अपेक्षाकृत कम होने के कारण गैरकानूनी गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है।
- कई देशों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म स्थानीय कानूनों और नियामकीय निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं करता।
- राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों में यह विरोधी समूहों और आंदोलनों के लिए एक बड़ा मंच बन जाता है।
- फर्जी खबरों, दुष्प्रचार और गलत सूचनाओं के प्रसार में कुछ चैनलों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
क्या है टेलीग्राम और कैसे हुआ इतना लोकप्रिय?
टेलीग्राम एक क्लाउड आधारित इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2013 में रूस के उद्यमी पावेल डुरोव और निकोलाई डुरोव ने की थी। इसका मुख्यालय वर्तमान में दुबई में स्थित है।
यह प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप, वीचैट, लाइन और वाइबर जैसे अन्य मैसेजिंग ऐप्स की तरह संदेश भेजने, कॉल करने, फोटो-वीडियो साझा करने और समूह बनाने की सुविधा देता है। हालांकि बड़े चैनल, विशाल समूह क्षमता और मल्टी-डिवाइस एक्सेस जैसी सुविधाओं ने इसे अलग पहचान दिलाई है।
दुनियाभर में इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या एक अरब से अधिक बताई जाती है। यही कारण है कि किसी भी देश द्वारा इस पर लगाया गया प्रतिबंध या नियंत्रण वैश्विक चर्चा का विषय बन जाता है।
किन देशों में प्रतिबंधित है टेलीग्राम?
भारत ऐसा पहला देश नहीं है जिसने टेलीग्राम पर सख्ती दिखाई हो। दुनिया के कई देशों ने सुरक्षा, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए इस प्लेटफॉर्म पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं।
कुछ देशों में टेलीग्राम पूरी तरह प्रतिबंधित है, जबकि कुछ स्थानों पर इसकी सेवाओं को सीमित किया गया है। नेपाल, चीन, पाकिस्तान, थाईलैंड, क्यूबा, वियतनाम और सोमालिया जैसे देशों में विभिन्न समय पर इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई गई। इन देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, गलत सूचना, साइबर अपराध और सरकारी नियमों के पालन से जुड़े मुद्दों को प्रमुख कारण बताया।
रूस, जहां से टेलीग्राम की शुरुआत हुई थी, वहां भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म और सरकार के बीच टकराव देखने को मिला है। वहीं चीन लंबे समय से विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़े नियंत्रण की नीति अपनाता रहा है।
कुछ देशों ने पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन नियम कड़े किए
कई देशों ने टेलीग्राम को पूरी तरह बंद नहीं किया, लेकिन इसके उपयोग पर विशेष प्रतिबंध या शर्तें लागू की हैं।
फ्रांस में डेटा सुरक्षा चिंताओं के कारण सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के लिए इसके उपयोग पर रोक लगाई गई। ब्राजील ने फेक न्यूज और जांच एजेंसियों को सहयोग न मिलने के मुद्दे पर कुछ समय के लिए इसकी सेवाएं निलंबित कर दी थीं।
जर्मनी और चेक गणराज्य में ऐसे कई चैनलों को ब्लॉक किया गया है जिन पर घृणा फैलाने या विदेशी प्रचार सामग्री प्रसारित करने के आरोप लगे थे। वहीं केन्या ने राष्ट्रीय परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक और नकल रोकने के उद्देश्य से अस्थायी रूप से इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई थी।
भारत ने क्यों उठाया यह कदम?
नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। ऐसे में री-एग्जाम से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी संदेशों की बाढ़ आने लगी। कई चैनलों और समूहों में कथित प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी और परीक्षा से जुड़े भ्रामक दावे साझा किए जा रहे थे।
सरकार और एनटीए का कहना है कि टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी रोक का उद्देश्य किसी प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि छात्रों को गलत जानकारी से बचाना और परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है। अधिकारियों के अनुसार, यदि लाखों अभ्यर्थियों के बीच अफवाहें फैलती हैं तो इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है और परीक्षा की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
गोपनीयता बनाम सुरक्षा की बहस फिर तेज
टेलीग्राम पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। एक पक्ष का मानना है कि उपयोगकर्ताओं की निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपराध, धोखाधड़ी या परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए हो रहा है तो सरकारों को हस्तक्षेप करने का अधिकार होना चाहिए।
फिलहाल भारत में टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध अस्थायी बताया गया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती ताकत के साथ उनकी जवाबदेही का सवाल भी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टेलीग्राम और सरकार के बीच इस मुद्दे का समाधान किस दिशा में जाता है और डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्या नए नियम सामने आते हैं।